उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: देशी गायों के संरक्षण, चारा सब्सिडी, बीमा लाभ और आवेदन प्रक्रिया की संपूर्ण मार्गदर्शिका। योगी सरकार की गौ कल्याण योजना की जानकारी के लिए विजिट करें – https://tattletody.com
Introduction
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में देशी नस्ल की गायों के संवर्धन और संरक्षण के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना, “मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना” की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के गौ आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, डेयरी उद्योग को बढ़ावा देना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।
इस लेख में, हम आपको यूपी स्वदेशी गौ संवर्धन योजना की पूरी जानकारी – उद्देश्य, लाभ, पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताएंगे।
Yojana Overview
| क्रम सं. | विषय | विस्तृत विवरण |
|---|---|---|
| 1. | योजना का नाम | मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना |
| 2. | शुरू करने वाली सरकार | उत्तर प्रदेश सरकार (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में) |
| 3. | लॉन्च वर्ष | 2023-24 |
| 4. | विभाग | पशुधन विभाग, उत्तर प्रदेश |
| 5. | मुख्य उद्देश्य | देशी गायों का संरक्षण एवं संवर्धन, डेयरी उद्योग को बढ़ावा, पशुपालकों की आय दोगुनी करना, गौ-आधारित जैविक अर्थव्यवस्था को मजबूत करना। |
| 6. | लाभार्थी | उत्तर प्रदेश के छोटे एवं सीमांत किसान, पशुपालक, गौशालाएं एवं गौ सदन। |
| 7. | पात्र गाय की नस्लें | साहीवाल, गिर, थारपारकर, राठी, हरियाणवी आदि भारतीय मूल की नस्लें। |
| 8. | प्रमुख लाभ/सहायता |
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| 9. | मुख्य विशेषताएं |
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| 10. | आवश्यक दस्तावेज | आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाता पासबुक, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो। |
| 11. | आवेदन प्रक्रिया | मुख्य रूप से ऑफलाइन: नजदीकी पशुधन विकास विभाग, डेयरी सहकारी समिति या ब्लॉक कार्यालय से फॉर्म लेकर आवेदन करें। ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने की प्रतीक्षा है। |
| 12. | आधिकारिक वेबसाइट | http://gaushala.up.nic.in/ |
| 13. | हमारी वेबसाइट | Www.tattletody.com |
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना के मुख्य उद्देश्य (Key Objectives)
इस योजना को शुरू करने के पीछे सरकार के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं:
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देशी गायों का संरक्षण: साहीवाल, गिर, थारपारकर जैसी देशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन को प्रोत्साहन देना।
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दुग्ध उत्पादन में वृद्धि: देशी गायों के दूध की गुणवत्ता और मात्रा में वृद्धि करके डेयरी उद्योग को मजबूत करना।
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पशुपालकों की आय दोगुनी करना: गौ पालन को एक लाभकारी व्यवसाय बनाकर किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाना।
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जैविक खेती को बढ़ावा: गोबर और गौमूत्र के उपयोग से जैविक खाद तैयार करना, जिससे जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।
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रोजगार सृजन: गौ संवर्धन, डेयरी प्रोसेसिंग और जैविक खाद उद्योग के माध्यम से नए रोजगार के अवसर पैदा करना।
योजना के प्रमुख लाभ और विशेषताएं (Benefits & Features)
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वित्तीय सहायता: योजना के तहत पशुपालकों और गौशालाओं को देशी नस्ल की गायों को खरीदने, उनके रख-रखाव और चारा प्रबंधन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
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बीमा लाभ: पंजीकृत देशी गायों का बीमा भी सरकार द्वारा करवाया जाएगा, जिससे पशुपालकों को किसी भी अनहोनी की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
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चारा सब्सिडी: गायों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और उसकी लागत कम करने के लिए चारे पर सब्सिडी दी जाएगी।
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स्वास्थ्य सेवाएं: गायों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए निःशुल्क टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
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प्रशिक्षण: पशुपालकों को आधुनिक तरीकों से गौ पालन, दुग्ध उत्पादन और गोबर खाद निर्माण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यूपी गौ संवर्धन योजना की पात्रता (Eligibility Criteria)
योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तों को पूरा करना आवश्यक है:
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आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
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लाभार्थी के पास देशी नस्ल की गायें होनी चाहिए या वह उन्हें खरीदने की इच्छुक हो।
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गौशालाएं/गौ सदन भी इस योजना के तहत पंजीकरण करा सकते हैं।
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आवेदक के पास पशु पालन के लिए पर्याप्त स्थान और संसाधन होने चाहिए।
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अन्य राज्य सरकार की लाभकारी योजनाओं का लाभ ले रहे परिवार भी आवेदन कर सकते हैं।
आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
योजना में आवेदन करते समय आपको निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ेगी:
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आवेदक का आधार कार्ड
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निवास प्रमाण पत्र (उत्तर प्रदेश)
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मोबाइल नंबर
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बैंक खाता पासबुक
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पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
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जमीन के कागजात (यदि applicable हो)
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पशु धन बीमा का विवरण (यदि हो)
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना में आवेदन कैसे करें? (Application Process)
योजना में आवेदन करने की प्रक्रिया अभी पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं हुई है, लेकिन निम्नलिखित तरीके से आप आवेदन कर सकते हैं:
ऑफलाइन आवेदन:
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सबसे पहले अपने नजदीकी पशुधन विकास विभाग, डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी या ब्लॉक कार्यालय से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
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फॉर्म को ध्यानपूर्वक भरें और सभी आवश्यक दस्तावेजों की अटैच्ड कॉपी संलग्न करें।
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इसके बाद फॉर्म को संबंधित अधिकारी के पास जमा कर दें।
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ऑनलाइन आवेदन (संभावित):
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माना जा रहा है कि जल्द ही आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया जाएगा। आवेदक ऑफिसियल पोर्टल http://gaushala.up.nic.in/ पर नजर बनाए रखें।
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ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च होने पर, आप रजिस्ट्रेशन करके सीधे आवेदन कर सकेंगे।
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योजना की अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ: http://gaushala.up.nic.in/
योजना के अंतर्गत पात्र देशी गाय की नस्लें (Eligible Indigenous Breeds)
योजना का लाभ केवल निम्नलिखित भारतीय मूल की नस्लों के लिए है:
| नस्ल का नाम | विशेषताएं | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|
| साहीवाल | उत्तम दूग्ध उत्पादन, शांत स्वभाव | पश्चिमी उत्तर प्रदेश |
| गिर | उच्च दूध उत्पादन क्षमता, रोग प्रतिरोधक | सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश |
| थारपारकर | सूखा सहनशील, सफेद रंग | बुंदेलखंड क्षेत्र |
| राठी | दुधारू, अच्छा दैनिक उत्पादन | पश्चिमी उत्तर प्रदेश |
| हरियाणवी | दूध और खेत के काम दोनों के लिए | पश्चिमी उत्तर प्रदेश |
योजना की चुनौतियाँ और समाधान (Challenges & The Way Forward)
हालाँकि योजना बहुत व्यापक है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियाँ हैं:
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जागरूकता का अभाव: ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बहुत से लोग योजना की पूरी जानकारी और लाभ से अनभिज्ञ हैं।
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लालफीताशाही: आवेदन प्रक्रिया में देरी और कागजी कार्रवाई की जटिलता एक बाधा हो सकती है।
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बाजार संपर्क: गौ आधारित उत्पादों (जैविक खाद, दीया आदि) के लिए स्थिर बाजार की कमी।
समाधान के रूप में:
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डिजिटल भुगतान: लाभ राशि का सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भुगतान (DBT)।
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आउटरीच कार्यक्रम: गाँव-गाँव में जागरूकता शिविर और मेला आयोजित करना।
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e-NAM और OMFED जैसे संस्थानों से जोड़: गौशालाओं और पशुपालकों के उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ना।
निष्कर्ष: गौ संवर्धन से राष्ट्र संवर्धन की ओर अग्रसर एक ऐतिहासिक योजना
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक सामाजिक दायित्व, आर्थिक क्रांति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का सुन्दर समन्वय है। यह योजना गौवंश के प्रति केवल भावनात्मक दृष्टिकोण रखने के बजाय, एक वैज्ञानिक एवं आर्थिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो इसे टिकाऊ और परिणामोन्मुखी बनाती है।
इस योजना के सफल क्रियान्वयन से न केवल देशी गायों का अस्तित्व सुरक्षित होगा, बल्कि इससे एक ऐसी समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा, जहाँ हर पशुपालक सम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनेगा। गोबर और गौमूत्र जैसे उत्पादों से अतिरिक्त आय का सृजन ‘ग्रीन जॉब्स’ के नए अवसर पैदा करेगा और जैविक खेती को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगा।
निस्संदेह, यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की दूरदर्शिता का एक जीवंत उदाहरण है, जो गौ कल्याण को राष्ट्र कल्याण से जोड़ती है। यह गौ आधारित अर्थव्यवस्था की ओर एक सशक्त कदम है और आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जन-जन के सहयोग से, यह योजना निश्चित ही प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने में सफल साबित होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधार स्तंभ बनेगी।
एक सुंदर, समृद्ध और स्वावलंबी उत्तर प्रदेश के निर्माण की इस पहल का हम सभी हार्दिक स्वागत करते हैं और इसके दूरगामी सकारात्मक परिणामों की कामना करते हैं।
योजना की अधिक जानकारी के लिए विजिट करें: https://tattletody.com
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना क्या है?
उत्तर: यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य में देशी नस्ल की गायों का संरक्षण, संवर्धन और उनके through पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है। यह गौ-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र कार्यक्रम है।
प्रश्न 2: इस योजना का लाभ लेने के लिए मैं पात्र कैसे हूं?
उत्तर: योजना के लिए मुख्य पात्रताएं हैं:
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आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना चाहिए।
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उसके पास देशी नस्ल की गायें होनी चाहिए या वह उन्हें पालने/खरीदने की इच्छुक हो।
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गौशालाएं एवं गौ सदन भी पात्र हैं।
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आवेदक के पास पशुपालन हेतु पर्याप्त स्थान होना चाहिए।
प्रश्न 3: योजना के अंतर्गत कौन-कौन सी देशी गाय की नस्लें शामिल हैं?
उत्तर: योजना में मुख्य रूप से भारतीय मूल की नस्लें जैसे साहीवाल, गिर, थारपारकर, राठी, और हरियाणवी आदि शामिल हैं। विदेशी या संकर नस्लें (जर्सी, हॉल्सटीन) इस योजना के दायरे में नहीं हैं।
प्रश्न 4: योजना के तहत किस प्रकार की वित्तीय सहायता मिलती है?
उत्तर: वित्तीय सहायता में निम्नलिखित लाभ शामिल हो सकते हैं:
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देशी गाय खरीदने पर अनुदान।
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चारा खरीद पर सब्सिडी।
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पशुधन बीमा पर सहायता।
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गौशाला/शेड निर्माण के लिए अनुदान।
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गोबर एवं गौमूत्र उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षण एवं आर्थिक सहायता।
प्रश्न 5: आवेदन कैसे करें? क्या आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है?
उत्तर: फिलहाल, आवेदन प्रक्रिया मुख्य रूप से ऑफलाइन है। आवेदकों को अपने नजदीकी पशुधन विभाग के कार्यालय, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस, या डेयरी सहकारी समिति से आवेदन फॉर्म प्राप्त करके भरना होगा और जमा करना होगा। ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू होने की स्थिति में आधिकारिक वेबसाइट http://gaushala.up.nic.in/ पर अपडेट दिया जाएगा।
प्रश्न 6: क्या शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं?
उत्तर: योजना का प्राथमिक फोकस ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों और किसानों पर है। हालाँकि, यदि शहरी क्षेत्र का कोई निवासी पशुपालन के लिए पर्याप्त स्थान और संसाधन रखता है तो वह आवेदन कर सकता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के आवेदकों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
प्रश्न 7: योजना में पशु बीमा की क्या व्यवस्था है?
उत्तर: योजना के अंतर्गत पंजीकृत देशी नस्ल की गायों का बीमा करवाया जाएगा। इस बीमा में सरकार द्वारा प्रीमियम राशि में सहायता (सब्सिडी) दी जा सकती है, जिससे पशु की अकाल मृत्यु या गंभीर बीमारी की स्थिति में पशुपालक को आर्थिक क्षतिपूर्ति मिल सके।
प्रश्न 8: क्या एक व्यक्ति एक से अधिक गाय के लिए आवेदन कर सकता है?
उत्तर: हाँ, योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक लाभार्थी एक से अधिक गाय के लिए आवेदन कर सकता है, लेकिन इसकी एक सीमा हो सकती है। लाभार्थी के पास संसाधनों और स्थान का सत्यापन किया जाएगा।
प्रश्न 9: आवेदन करने के लिए किन दस्तावेजों की आवश्यकता होगी?
उत्तर: मुख्य दस्तावेज हैं: आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, बैंक खाता पासबुक, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो, और जमीन के कागजात (यदि लागू हो)।
प्रश्न 10: योजना की अधिक जानकारी के लिए मैं कहां संपर्क कर सकता हूं?
उत्तर: योजना की किसी भी जानकारी के लिए आप अपने जिले के पशुधन अधिकारी (District Livestock Officer) के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। आधिकारिक अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट http://gaushala.up.nic.in/ पर नजर रखें।
प्रश्न 11: क्या इस योजना में बैलों (बैल गाड़ी वाले) को भी शामिल किया गया है?
उत्तर: योजना का प्राथमिक फोकस दुधारू देशी नस्ल की गायों के संवर्धन पर है। हालाँकि, योजना का लक्ष्य गौवंश के समग्र कल्याण को बढ़ावा देना है। भविष्य में देशी नस्ल के बैलों को कृषि कार्यों में उपयोग हेतु शामिल करने के लिए अलग से घटक हो सकता है। नवीनतम जानकारी के लिए पशुधन विभाग से संपर्क करें।
प्रश्न 12: गाय खरीदने के लिए मिलने वाले अनुदान की राशि कितनी है?
उत्तर: अनुदान की सटीक राशि योजना के दिशा-निर्देशों पर निर्भर करती है और इसे समय-समय पर संशोधित किया जा सकता है। सामान्य तौर पर, यह गाय की नस्ल और लागत के एक निश्चित प्रतिशत (जैसे 50% से 70%) के रूप में हो सकती है। सही राशि की जानकारी के लिए आवेदन करते समय अधिकारी से पुष्टि अवश्य कर लें।
प्रश्न 13: क्या गौशाला को इस योजना में पंजीकरण कराना अनिवार्य है? यदि हाँ, तो कैसे?
उत्तर: हाँ, गौशालाओं को योजना का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए पशुधन विभाग के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य है। इसके लिए गौशाला प्रबंधन को संबंधित जिला अधिकारी के कार्यालय में गौशाला का विवरण, पशुओं की संख्या और नस्ल का ब्यौरा देकर आवेदन करना होगा।
प्रश्न 14: यदि मेरी गाय की अकाल मृत्यु हो जाती है, तो बीमा दावा प्रक्रिया क्या है?
उत्तर: पशु की मृत्यु की स्थिति में, लाभार्थी को तुरंत:
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नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाना होगा।
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इस प्रमाणपत्र के साथ बीमा कंपनी में दावा फॉर्म जमा करना होगा।
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पशुधन विभाग के अधिकारी इस प्रक्रिया में सहायता प्रदान कर सकते हैं।
प्रश्न 15: क्या योजना के तहत गोबर खाद इकाई लगाने के लिए अलग से कोई अनुदान है?
उत्तर: हाँ, योजना का एक प्रमुख घटक गोबर के मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करना है। इसमें वर्मीकम्पोस्ट यूनिट, गोबर के कंडे बनाने की मशीन, या अन्य उत्पाद बनाने की इकाई स्थापित करने के लिए पृथक वित्तीय सहायता या अनुदान का प्रावधान है। इसके लिए एक अलग परियोजना प्रस्ताव जमा करने की आवश्यकता हो सकती है।
प्रश्न 16: क्या आवेदन करने के लिए कोई आयु सीमा निर्धारित है?
उत्तर: आमतौर पर, मुख्य आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। हालाँकि, अगर कोई नाबालिग वास्तविक लाभार्थी है, तो उसके माता-पिता या अभिभावक उसकी ओर से आवेदन कर सकते हैं।
प्रश्न 17: योजना के तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम कहाँ और कैसे आयोजित किए जाते हैं?
उत्तर: प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), जिला स्तरीय पशुधन प्रशिक्षण केंद्रों, या प्रमुख गौशालाओं पर आयोजित किए जाते हैं। पंजीकृत लाभार्थियों को उनके मोबाइल नंबर के माध्यम से इन प्रशिक्षण सत्रों की सूचना दी जाती है।
प्रश्न 18: क्या योजना में शामिल होने के बाद गाय का दूध बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा?
उत्तर: हाँ, योजना का एक उद्देश्य बाजार संपर्क (Market Linkage) सुनिश्चित करना है। पशुपालकों को उनके दूध और गौ-आधारित उत्पादों को डेयरी सहकारी समितियों, OMFED, या e-NAM जैसे प्लेटफॉर्म से जोड़ने में सहायता प्रदान की जाएगी, ताकि उन्हें उचित मूल्य मिल सके।
प्रश्न 19: आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति (Status) कैसे चेक करें?
उत्तर: वर्तमान में, आवेदन की स्थिति जानने का सबसे विश्वसनीय तरीका है कि आप संबंधित ब्लॉक या जिला स्तर के पशुधन विभाग के अधिकारी से सीधे संपर्क करें और अपने आवेदन पत्र की रसीद संख्या दिखाएं। भविष्य में ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा शुरू हो सकती है।
प्रश्न 20: यदि आवेदन अस्वीकार हो जाता है, तो क्या अपील (Appeal) का कोई प्रावधान है?
उत्तर: हाँ, यदि आवेदन किसी कारणवश अस्वीकार हो जाता है, तो आवेदक अगले उच्च अधिकारी के पास अपनी शिकायत या अपील दर्ज करा सकता है। उ ví dụ के लिए, यदि ब्लॉक स्तर पर आवेदन अस्वीकार हुआ है, तो जिला स्तर के अधिकारी से अपील की जा सकती है।
प्रश्न 21: क्या इस योजना का लाभ अन्य पशुधन योजनाओं (जैसे भेड़-बकरी पालन) के साथ मिला सकते हैं?
उत्तर: सामान्य नियम के अनुसार, एक ही परिवार विभिन्न योजनाओं का लाभ ले सकता है, बशर्ते वह उनकी पात्रता शर्तों को पूरा करता हो। हालाँकि, एक ही उद्देश्य के लिए दो योजनाओं का लाभ (जैसे दो अलग-अलग योजनाओं से एक ही गाय के लिए अनुदान) नहीं मिल सकता है।
प्रश्न 22: गाय के बीमा के लिए कौन-सी बीमा कंपनियाँ भागीदार हैं?
उत्तर: इसके लिए सरकार द्वारा एमओयू (MOU) के through विभिन्न सार्वजनिक और निजी बीमा कंपनियों (जैसे – एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया, ICICI लोम्बार्ड आदि) को शामिल किया जाता है। सही भागीदार बीमा कंपनी की जानकारी पशुधन विभाग से प्राप्त करें।
नोट: ये जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के लिए है। योजना के विस्तृत दिशा-निर्देशों और नवीनतम अपडेट के लिए कृपया आधिकारिक स्रोतों से सत्यापन अवश्य कर लें।
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