Bihar Mukhyamantri Prakhand Parivahan Yojana: ग्रामीण परिवहन क्रांति का विस्तृत विवरण

बिहार मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना के पीछे की स्थिति और ज़रूरत

बिहार देश के सघनतम राज्यों में आता है। इसकी 88 प्रतिशत से ज्यादा आबादी गांवों में रहती है। लंबे समय से गांवों में आवागमन का साधन कमजोर रहा है। बहुत से इलाकों में बसें नहीं जातीं, कभी-कभार आती-जाती भी हैं तो ठीक से नहीं। ऐसी स्थिति में, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने एक कदम उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना शुरू की। पूरे राज्य के 534 प्रखंडों में यह योजना फैली है। 38 जिलों में यह लागू है। एक तरह से इसका निशाना है – हर छोटे कोने तक पहुंच बनाना।

इस योजना की समग्रता पर नज़र डालें।

बिहार मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना का दायरा सिर्फ गाड़ियाँ बांटने तक नहीं रुकता। हर पहलू में छोटे-छोटे बदलाव की कोशिश झलकती है। चलती गाड़ियों की भीड़, सड़कों की सूझबूझ, लोगों की ट्रेनिंग, गाड़ियों की ठीक-ठाक देखभाल – सब जुड़े हैं। आखिरकार, एक ऐसा तंत्र बनाने की कोशिश है जो गाँव में सचमुच काम करे।

Table of Contents

बिहार मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना के विस्तृत घटक

 वाहन आवंटन संरचना

हर प्रखंड में लगभग 20 से 25 गाड़ियाँ मिली हैं।
तरह-तरह के वाहन होते हैं।
गांवों के बीच सफर आसान होगा। 8 से 10 यात्रियों की क्षमता वाली छोटी बसें चलेंगी। इनके जरिए सुदूर इलाकों में जाना संभव हो पाएगा। कहीं भी, कभी भी पहुंच बनेगी। सड़कों पर अब नई रौनक दिखेगी।
– इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा: पर्यावरण अनुकूल विकल्प
एक साथ कई यात्रियों को ले जा सकने वाली जीप। पहाड़ी रास्तों में चलने के लिए बनी है।
थोड़ी दूरी के माल ढोने में ये गाड़ी काम आती है। खेत से फसल ले जाने के लिए इनका उपयोग होता है।

 वित्तीय प्रावधान (विस्तृत)

एक वाहन की लागत पर अधिकतम 40 प्रतिशत की सहायता मिल सकती है। इसकी सीमा दो लाख रुपये तक है।
को-ऑपरेटिव बैंकों से पैसा मिलता है, जब खाते में कुछ नहीं बचा हो।
गारंटी मिली हुई है सरकार की तरफ से। अगर कभी कर्ज़ चुकाना छोड़ दें, तब भी।
पहले दो साल में 6% ब्याज सब्सिडी मिलती है।
पहले साल में गाड़ी के बीमा की लागत सरकार उठाती है।

 पात्रता मानदंड (विस्तृत)

आवेदक के लिए:

  • घर बिहार में होना ज़रूरी है।
  • इक्कीस साल की उम्र से होना शुरू, पचास में खत्म।
  • हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी होनी चाहिए। कुछ मामलों में, इस शर्त से राहत दी जा सकती है।
  • एक कानूनी रूप से मान्य ड्राइविंग परमिट होना चाहिए, जो LMV या तीन पहिया वाहन चलाने के लिए हो।
  • सालभर में घरवालों की कमाई तीन लाख से कुछ कम होती है।

प्राथमिकता क्रम:

1. युवा, जो काम ढूंढ रहे हैं – खासतौर पर वो, जिन्होंने ग्रेजुएशन किया है।
2. महिला ड्राइवर
3. एक ऐसा इंसान जिसे चलने में दिक्कत होती है, उसके लिए कुछ गाड़ियाँ खास तरह से बनाई जाती हैं।
4. भूमिहीन कृषि मजदूर
5. मनरेगा कार्ड धारक

6.काम चलाने की तरीका और संभालने का ढंग।

मार्ग नियोजन

एक-एक प्रखंड में हर बार 5 से 7 अलग-अलग मुख्य रास्तों का चयन हुआ।
पथों की योजना तब होती है जब आसपास के पंचायत समिति के साथ बातचीत हो।
हर सड़क का सफर होता है। लंबाई भिन्न हो सकती है, 15 से 30 किमी तक।
हर रोड के हिसाब से कम से कम तीन गाड़ियों का इस्तेमाल।

किराया संरचना

किराए की सबसे कम और सबसे ज्यादा दरें, जो सरकार ने तय की हैं।
मसलन 0 से 5 किलोमीटर के भाड़े में ₹10 से ₹15 तक होता। उसके बाद अगले पाँच किलोमीटर, यानि 5 से 10 किमी, में ₹15 से ₹25 पड़ते।
हर सीनियर सिटीज़न को मिलता है बीस प्रतिशत कम। कुछ छात्र भी इसके अंदर आते हैं। जब तक वैलिड आईडी हो, फायदा मिलता रहेगा। दिव्यांग व्यक्ति भी उसी दर पर खरीद सकते हैं। कभी-कभी ऑफर बदल जाता है, लेकिन छूट अक्सर चलती रहती है।
हर महीने के लिए पास मिलता है। जो लोग बार-बार यात्रा करते हैं, उनके लिए यह आसानी भरा हल है।

समय सारणी

छह बजे सुबह शुरू होकर आठ बजे रात तक चलती है।
हर ट्रैक पे कुछ देर बाद गाड़ी आती है। लगभग छोटे समय फासले में, 30 से 45 मिनट के बीच। कभी जल्दी, कभी थोड़ा इंतजार। घड़ी की ओर देखना पड़ेगा।
हर रविवार को, साथ ही सरकारी छुट्टियों पर भी, सेवा के आधे हिस्से की गारंटी।

सीखने कि तैयारी होती है, फिर उसके बाद समझ मजबूत होती है।

ड्राइवर प्रशिक्षण

पंद्रह दिन का रहकर पढ़ाई का मौका।
सड़क पर गाड़ी चलाने में होशियारी दिखानी होती है। इंजन की जाँच समय-समय पर करना बेहतर होता है। अगर कोई घायल हो जाए, तुरंत मदद शुरू करनी चाहिए। यात्री के साथ बातचीत सभ्य ढंग से होनी चाहिए।
हर जिले में प्रशिक्षण का काम ITI और ड्राइविंग स्कूलों में होता है।
सरकारी तौर पर मान्यता प्राप्त होता है प्रमाणपत्र, जब कोई प्रशिक्षण पूरा कर लेता है।

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण

– वित्तीय प्रबंधन
– बीमा व कर संबंधी जानकारी
भुगतान के अंकीय तरीकों में हाथ साफ़ करना है।
– बुनियादी लेखांकन

प्रौद्योगिकी एकीकरण

डिजिटल प्लेटफार्म
हर कोई अब स्मार्टफोन पर काम करता है। यात्रियों के लिए एक अलग सॉफ्टवेयर है। वाहन चलाने वालों के हिसाब से भी एक खास वर्जन मौजूद है। दोनों अलग-अलग ज़रूरतों पर काम करते हैं।
हर पल की गति देखना। सटीक स्थान मिलता है, GPS के ज़रिए चल रहे वाहन का पता चलता है।
भुगतान अब होता है मोबाइल से, UPI के जरिए। कई लोग पसंद करते हैं वॉलेट का इस्तेमाल। कार्ड भी चलते हैं, खासकर दुकानों में।
परिवहन भवन, पटना में एक कंट्रोल रूम है। यहाँ से निगरानी का काम केंद्रित ढंग से संभाला जाता है।

सूचना प्रणाली

एक मशीन होती है जो बस के किराए का टिकट छापती है।
हर पल का हिसाब रखने वाला स्क्रीन। में चढ़ती-गिरती संख्याएं, पैसों का आवागमन।
शिकायत का हल अब सीधे ऑनलाइन मिलेगा।
हर पल मिलता है समर्थन। कॉल करें – ये नंबर कभी बंद नहीं होता।

संस्थागत ढांचा

संचालन समिति
इस समिति के प्रमुख मुख्य सचिव (परिवहन) होंगे।
जिले की समिति में जिलाधिकारी होते हैं प्रमुख।
स्थानीय लोगों के साथ BDO द्वारा संचालित होती है प्रखंड स्तर की समिति।

निगरानी तंत्र
हर महीने की जाँच पड़ताल वाली बैठकें
लोगों के समूह सामाजिक लेखा परीक्षण में शामिल होते हैं।
हर तीन महीने के हिसाब से काम का जायज़ा।
हवाई जहाज में सफर करने वालों का अपने अनुभव के बारे में बताना।

एक सूत्र में कई फायदे छिपे हैं।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

1. एक दस हजार से ज्यादा ड्राइवर सीधे तौर पर काम मिला।
2. मरम्मत के केंद्रों में काम होता है। वहीं, चार्जिंग स्थल पर भी लोग जुड़ते हैं। कभी-कभी किराए के दफ्तरों में भी अवसर मिल जाते हैं।
3. एक अनुमान है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित और आसान यात्रा के ज़रिए उनकी गतिशीलता में 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
4. गाँव के बच्चों के लिए कॉलेज या विश्वविद्यालय में दाखिला अब कम कठिन है।

हेल्थकेयर पर असर

हॉस्पिटल पहुँचने में आसानी हो तो गर्भवती महिलाओं का बड़ा फायदा।
अगर हाथ में कोई बड़ी चोट लगे, तब अस्पताल पहुंचना सीधे जान बचा सकता है।
हर बार दवा के लिए पैदल चलना पड़ता था। फिर स्कूटर मिला, अब डॉक्टर की नजर आसान हो गई। घर से बाहर निकलना कभी इतना सीधा नहीं था।

खेती के नतीजे में आर्थिक हालात पर फर्क पड़ता है।
सीधे बाजार में किसानों का आना।
किसानों की फसल का अच्छा दाम मिल सकता है।
बाज़ार में हस्तशिल्प के लिए रास्ता खुला। स्थानीय चीज़ों को पहचान मिली, धीरे-धीरे। आने वाले दिनों में बदलाव की सूरत नज़र आई। इसके अलावा, कामगरों को सीधा फायदा हुआ।
गाँवों में छुपे कोने हैं, जहाँ से पर्यटन की शुरुआत हो सकती है।

चुनौतियाँ एवं निवारण रणनीति

 वित्तीय स्थिरता की चुनौती

समाधान:
किराए की ऊँचाई को समझने के पीछे छुपा है गहरा अध्ययन।
इससे कमाई में थोड़ा और पैसा बढ़ता है।
दुकानदारों का साथ मिला तो प्रायोजन संभव हुआ।

वाहन रखरखाव

समाधान:
सर्विस सेंटर की शुरुआत प्रखंड में होगी। जहाँ लोग आकर काम कर सकेंगे। इसे बनाने का उद्देश्य सुविधा पहुँचाना है। कार्य शुरू होने के बाद समय लगेगा। सभी तैयारियाँ अब चल रही हैं।
हर दिन चलने वाली मशीनों की जांच के लिए ट्रक पर सजा गया औज़ार।
हर जिले में एक भंडारगृह होता है। वहाँ बचे हुए हिस्से रखे जाते हैं। कभी-कभी मरम्मत के लिए इनकी आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में नजदीकी गोदाम से सामान निकाला जाता है। इससे समय की बचत होती है।

 ईंधन लागत

समाधान:
बिजली से चलने वाली गाड़ियों के लिए प्रोत्साहन मिल रहा है।
– सोलर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना
गैस से चलने वाली गाड़ियों हेतु इंतजाम किया गया।

 सुरक्षा संबंधी चिंताएँ

समाधान:
हर गाड़ी के अंदर जीपीएस लगा है। अचानक खतरे में पुकारने के लिए बटन भी तय है।
एक अलग सोच के साथ महिला चालकों को नौकरी में जगह देने की दिशा में कदम।
हर कुछ समय बाद पुलिस घूमती है। कभी-कभी जाँच होती है। चौकसी रखने वाले अधिकारी आते जाते रहते हैं।

हर छोटी प्रगति का आकलन।
1. हर गाड़ी में कम से कम 50 मुसाफिर होंगे। एक दिन में इतना सफर करेगा हर वाहन।
2. हर बार जब समय की बात आई, तो 85 प्रतिशत से ज़्यादा मामलों में ठीक समय पर काम हुआ।
3. हर सौ में से नब्बे के करीब लोगों ने अपनी खुशी जताई।
4. हर रोज़ के 100 में से 95 गाड़ियाँ चल रही हैं।
5. हादसों की संख्या इतनी कम हो कि मुश्किल से कोई गिनती में आए।

अगले पड़ाव में बढ़ने की सोच।
अब तक कुल 534 प्रखंडों में सेवा उपलब्ध है।
दूसरे चरण में, दो साल के भीतर हर पंचायत तक पहुँच।
पाँच साल के भीतर हर गाड़ी बदलकर इलेक्ट्रिक हो जाएगी।
दस साल में चौथे पड़ाव पर। स्वचालित गाड़ियों की पहली झलक। परखी जाएगी सड़कों पर।

बिहार मुख्यमंत्री की प्रखंड परिवहन योजना में नामांकन की प्रक्रिया क्या है?

इस फॉर्म को भरने का मौका ऑफिस में बैठकर भी है। वैसे ही पोस्ट के रास्ते घर बैठे-बैठे भी डाल सकते हो।
1. वेबसाइट transport.bihar.gov.in पर जाने से होता है ऑनलाइन प्रक्रिया की शुरुआत।
2. बिना ऑनलाइन हुए: प्रखंड कार्यालय या फिर जिला परिवहन कार्यालय में जाकर फॉर्म ले लें।

FAQs

Q1: आवेदन के लिए कौन-से दस्तावेज आवश्यक हैं?

Ans: इन दस्तावेज़ों की जरूरत पड़ेगी।

  • आधार कार्ड
  • घर के पते का सबूत होता है यह।
  • आय का सरकारी कागज।
  • एक छोटी कार चलाने के लिए जरूरी कागज।
  • एक ऐसा कागज होता है जिसमें लिखा रहता है कि आदमी कितने साल का है।
  • एक के बाद एक दो पासपोर्ट तस्वीरें होनी चाहिए।
  • खाते की जानकारी से पता चलता है कि पैसा कहाँ आया।
  • जाति से जुड़ा दस्तावेज, मगर सिर्फ उन्हीं के लिए जो आरक्षण के दायरे में आते हैं

Q2 शुल्क के रूप में कितना पैसा चाहिए?
Ans: एक सौ रुपये का फीस लगता है, भरा जा सकता है इंटरनेट के माध्यम से या पोस्ट ऑफिस में जाकर।

Q3: आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?
Ans: हर चरण के लिए तारीखें अलग से घोषित होती हैं, फिर भी योजना लगातार जारी रहती है। ताज़ा खबरें साइट पर मिलती रहती हैं।

पात्रता संबंधी प्रश्न

Q4: इस योजना के लिए कौन पात्र है?
Ans: बस्ती में पैदा हुआ, जिंदगी भर वहीं रहने वाला।
इक्कीस साल की उम्र से शुरू होकर। पचास में खत्म हो जाता है।
दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए।
एक सही तरीके से जारी किया गया ड्राइविंग परमिट होना चाहिए।
साल में पैसा कमाया जो 3 लाख से थोड़ा कम होता।

Q5 क्या इसमें महिलाएँ भी शामिल हो सकती हैं?
Ans: बिल्कुल, महिलाओं के लिए अलग से प्रोत्साहन है – इसके चलते उन्हें आगे रखा जाता है।

Q6 शारीरिक चुनौतियों वाले लोग आवेदन कर सकते हैं।?
Ans: बहरहाल, दिव्यांगजनों की ज़रूरतों के मुताबिक कुछ खास इंतजाम हैं। ऐसे लोगों के लिए गाड़ियाँ उनकी पहुँच और सुविधा के हिसाब से ढाली जाती हैं।

Q7 उस शख्स के बारे में, जिसने पहले कोई सरकारी योजना का फायदा उठाया है – आवेदन करना मुमकिन है?
Ans: अगर कभी किसी और स्वरोजगार योजना का फायदा उठा चुके हैं, तो इसमें आवेदन की अनुमति नहीं मिलेगी।

Q8 हर साल सरकार कुछ पैसे बचाने में मदद के लिए देती है?
Ans: हर एक वाहन पर सरकार तकरीबन 40% तक की छूट देती है। ये रकम अधिकतम दो लाख रुपये तक हो सकती है।

Q9 कुल राशि में से जो हिस्सा बचता है, उसे पाने के लिए क्रेडिट की व्यवस्था कैसे होगी?
Ans: ऋण मिलता है मान्यता प्राप्त बैंकों व सहकारी समितियों से, क्योंकि सरकार खड़ी होती है गारंटी के तौर पर।

Q10 क़र्ज़ चुकाने में कितना समय लगता है?
Ans: पाँच साल के भीतर क़र्ज़ चुकता करना होगा, इसमें छह महीने की राहत भी पहले मिल जाएगी।

Q11 ब्याज में छूट कभी-कभी उपलब्ध होती है।?
Ans: जी हां, शुरुआत के दो साल में 6 प्रतिशत का ब्याज अनुदान मिलता है।

Q12 किस तरह की गाड़ियों का इस्तेमाल होता है?
Ans: एक छोटी बस, कमरे में सामान्यतया आठ से दस लोग बैठ सकते हैं।
– इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा
– 7-सीटर वाहन
थोड़ी दूर तक सामान ढोने के लिए प्रयुक्त हल्का ट्रक।

Q13 गाड़ी किसी भी प्रखंड में इस्तेमाल हो सकती है।?
Ans: बस, गाड़ियां सिर्फ उन्हीं रास्तों पर दौड़ सकती हैं जो तयशुदा प्रखंड में शामिल हों।

Q14 किराए की दर का फैसला कौन करेगा?
Ans: प्रखंड स्तर पर बनी समिति किराए को ठीक करती है। सरकार के दिशा-निर्देशों में छोटी और बड़ी सीमा होती है। उसी के भीतर यह फैसला होता है।

Q15 वाहन को कई घंटों तक चलाया जा सकता है, बस इंजन की स्थिति पर निर्भर करता है?
Ans: सुबह छह बजे से पहले कोई गाड़ी नहीं चलेगी। शाम आठ बजे के बाद भी नहीं। इन समय के बीच में अगर चले, तो ज्यादा से ज्यादा बारह घंटे तक ही चल सकती है।

Q16 हफ्ते के अंत में, जैसे रविवार को, सेवा उपलब्ध होगी। छुट्टियों पर भी काम जारी रहेगा?
Ans: रविवार को भी सेवा जारी रहेगी, सरकारी छुट्टी के दिन भी। कम से कम आधे वाहन चलेंगे।

Q17 अगर हादसा हो जाए तब कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए?
Ans: 
1. सहायता के लिए 108 या 155444 पर अभी संपर्क करना शुरू कर दें।
2. अगर कोई घायल है, तो उसे सबसे करीबी अस्पताल ले जाना चाहिए।
3. अगले 24 घंटों में प्रखंड कार्यालय में शिकायत दर्ज होनी चाहिए।

Q18: क्या प्रशिक्षण अनिवार्य है?
बेशक, चुने हुए हर उम्मीदवार का 15-दिन का रहकर पढ़ाई करना ज़रूरी है।

 

 

 

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