Bihar Student Credit Card Scheme: उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता

परिचय

बिहार के अच्छे छात्रों को आगे पढ़ने में मदद मिले, इसलिए यहाँ की सरकार ने एक नई योजना शुरू की है। उच्च शिक्षा के खर्चे को लेकर चिंता कम हो, इसके लिए बिना जमानत के पैसे दिए जाते हैं। इसका फायदा गरीब परिवारों के बच्चों तक भी पहुँचे, ऐसा इरादा है। अच्छे अंक लाने वाले छात्र इस लोन के लिए आवेदन कर सकते है । एक ओर शिक्षा को बढ़ावा देना है, तो दूसरी ओर आर्थिक बाधाओं को घटाना भी।

योजना का शुभारंभ

दो अक्टूबर, 2016 को नीतीश कुमार ने एक कदम उठाया। उन्हीं के नेतृत्व में छात्रों के लिए क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत हुई। इस पहल पर राज्य के शिक्षा विभाग ने काम किया। विचार से लेकर अमल तक, सब धीरे-धीरे आगे बढ़ा।

इसकी प्रमुख तरजीह किसी बात पर ध्यान केंद्रित करना है।
1. पढ़ाई तब भी जारी रहे जब पैसों की कमी हो।
2. हुनरमंद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए हौसला मिलता है।
3. कुछ समय पहले की तुलना में अब नौकरी खोज रहे लोगों की संख्या कम हुई है।
4. छात्रों के कौशल विकास को बढ़ावा

मूलधन की जानकारी

  • एक छात्र को इस योजना में अधिकतम 4 लाख रुपये मिल सकते हैं। उधार की रकम के बारे में जानकारी आगे दी गई है।
  • एक बार में ज्यादा से ज्यादा 4 लाख रुपये लिए जा सकते हैं।
  • हर साल चुकाना होगा महज़ चार प्रतिशत ब्याज। सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी की वजह से इतना कम दाम।
  • पंद्रह साल तक मिल सकता है लोन, मंजूरी मिलने के बाद।
  • पढ़ाई खत्म होने के बाद, पाँच साल तक कुछ नहीं चुकाना पड़ता है।
  • कर्ज़ की रकम बांटी गई।
  • हर साल कोर्स चलने तक पैसा मिलता रहेगा।

एक बच्चे की पढ़ाई खत्म होने पर मिल सकता है तय रुपयों का भुगतान। इसमें ग्रेजुएशन के बाद ऊपर की पढ़ाई के लिए थोड़ा ज्यादा पैसा रखा गया है। हर साल इस राशि को छात्र के खाते में डाला जाता है।
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हर साल एक लाख रुपये खर्च होता है। चार लाख में पूरी पढ़ाई खत्म हो जाती है। स्नातक की डिग्री के लिए यही खर्च आता है।
मास्टर डिग्री लेने पर खर्च होगा 4 लाख। इतना पैसा लगेगा, जब तक कोर्स चलेगा। अवधि बढ़ी, तो खर्च भी बढ़ सकता है।
एक बार फिर से छात्रों के लिए पैसों का सवाल। 4 लाख रुपये की आधिकारिक रसीद में दर्ज है। कहीं ऊपर लिखा है, संस्थान के अनुसार यही खर्च आता है। तकनीकी शिक्षा के नाम पर इतना? पैसा वसूला गया है।
हर साल चार लाख रुपये। पैसा कोर्स के हिसाब से जाता है। इनमें व्यापार से जुड़े विषय शामिल हैं।

पात्रता मानदंड

1. रहने का पता बिहार में होना ज़रूरी है, ऐसा इसलिए क्योंकि आवेदन करने वाले को वहीं का होना चाहिए।
2. उम्र का हिसाब रखते हुए, आवेदक की उम्र 25 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। कई बार खास मामलों में इसमें ढील भी मिल सकती है।
3. हाईस्कूल के बाद कम से कम एक और पढ़ाई पूरी हुई हो।
4. किसी मान्यता प्राप्त भारतीय संस्थान में छात्र का दाखिला होना जरूरी है।
5. एक परिवार की सालभर में कमाई बारह लाख रुपये से ज़्यादा न हो।

आवश्यक दस्तावेज

1. आवेदन पत्र (ऑनलाइन/ऑफलाइन)
2. आयु प्रमाण पत्र
3. निवास प्रमाण पत्र
4. एक शख्स की पढ़ाई से जुड़ी कागजी पहचान।
5. एक कॉलेज ने दिया छात्र को आने की हरी झंडी।
4. आय प्रमाण पत्र
5. बैंक खाता विवरण
6. पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ

आवेदन प्रक्रिया

1. इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक साइट पर जाकर फॉर्म भर सकते हैं। फॉर्म https://www.7nishchay-yuvaupmission.bihar.gov.in/ पर मिलेगा। अपनी प्रोफ़ाइल बनाने के बाद डिटेल्स अपडेट करें। जरूरी दस्तावेज़ अपलोड करना न भूलें। आवेदन पूरा करने के बाद कन्फर्मेशन प्राप्त होगा।
2. आवेदन का फॉर्म हासिल करने के लिए, डीईओ के ऑफिस जाना होगा।
3. हर एक दस्तावेज़ की सच्ची कॉपी लगा दें।
4. जब फॉर्म भेज दिया जाए, तो उसकी प्रगति इंटरनेट के माध्यम से देखी जा सकती है।

लोन चुकौती

पढ़ाई खत्म होने के पांच साल बाद, कर्ज चुकाने की अवधि शुरू हो जाती है।
दस साल तक के लिए पेमेंट को फैलाया जा सकता है।
बेरोजगारी के दौर में किस्तों का भुगतान आगे खिसका सकता है।
एक बार अगर छात्र को सरकारी नौकरी मिल जाए, तब उसके पैसे से ऋण कटवाया जा सकता है।

योजना के लाभ

1. सरकार की तरफ से कर्ज़ पर मिलने वाली छूट।
2. बिना कोई जमानत दिए लोन मिल सकता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि प्रॉपर्टी या कोई चीज़ गिरवी नहीं रखनी पड़ती।
3. पन्द्रह साल तक के लिए भुगतान की मियाद हो सकती है।
4. हर तरह के कोर्स मिलते हैं – जैसे टेक्निकल। इसके अलावा, प्रोफ़ेशनल भी उपलब्ध हैं। गैर-टेक्निकल विषयों पर भी खास ध्यान दिया जाता है। कुछ ऐसे विकल्प भी हैं जो रोजमर्रा के कामकाज में काम आएँ।
5. पढ़ाई के लिए जहाँ भी हो, चाहे घरेलू हो या बाहरी देश।

चुनौतियाँ और समाधान

1. गाँवों में लोगों को पता ही नहीं होता कि ऐसी योजना है। कई बार सूचना वहाँ तक पहुँचती ही नहीं।
2. गरीब घरों के पास डॉक्यूमेंट इकट्ठा करने में बहुत दिक्कत होती है।
3. कई बार लोगों को पैसे मिलने में समय लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि कुछ बैंक फैसला करने में धीमे होते हैं। जब आवेदन जाता है, तो उसकी जांच में घंटे या दिन लग सकते हैं। कभी-कभी दस्तावेज़ों की वजह से भी अटकाव होता है। हालाँकि, हर बैंक ऐसा नहीं करता।
4. इधर सरकार कुछ कदम उठा रही है। जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चल रहे हैं। प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। एक निगरानी प्रणाली काम कर रही है।

सफलता के आंकड़े

इतने समय में लाखों छात्र योजना का हिस्सा बन चुके हैं। राज्य सरकार के पास मौजूद आंकड़े यही कहते हैं।
एक करोड़ से ज्यादा फॉर्म मिले।
हज़ारों छात्रों को मदद मिली। पांच लाख से ज़्यादा युवाओं ने लोन पाने का मौका पाया। कई बैंकों ने इसमें हाथ बढ़ाया। ऋण देने का सिलसिला पिछले कुछ महीनों से जारी है।
इतना पैसा जितना कई छोटे शहरों के सालाना बजट के बराबर हो – उससे भी आगे निकल गई ऋण राशि।
गरीब व मध्यम आय वाले परिवारों के अधिकतर लाभुक हैं।

नवीनतम अपडेट

हाल में बिहार सरकार ने इस योजना में कई बदलाव किए।
1. सोचने की बात है कि क्या उधार की सीमा अब और बढ़ाई जाए।
2. अब आवेदन करने का तरीका थोड़ा आसान हो गया है।
3. पोर्टल के ऑनलाइन संस्करण में बदलाव आए।
4. एक दिन में ही पैसे मिलने लगे।

निष्कर्ष

बिहार के युवाओं के लिए छात्र क्रेडिट कार्ड योजना नई दिशा खोलती है। प्रतिभाशाली बच्चे, जिनके परिवार कमाऊ नहीं पाते, अब पढ़ाई में आगे बढ़ सकते हैं। इसका फायदा तभी होगा जब इसे सही ढंग से चलाया जाएगा। अगर ध्यान से देखा गया, तो यह योजना रोजगार की राह बना सकती है। शिक्षा के जरिए राज्य के भविष्य में बदलाव आएगा।

महत्वपूर्ण लिंक

आधिकारिक वेबसाइट: https://www.7nishchay-yuvaupmission.bihar.gov.in/
हेल्पलाइन के लिए संपर्क करें – 0612-2216430

ई-मेल: [email protected]

हाल की जानकारी हेतु सरकारी वेबसाइट देखें, या फिर ज़िला शिक्षा कार्यालय में पूछताछ कर लें।

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